श्री महाकालेश्वर मंदिर में ग्रीष्मकाल से बचाव के लिए ठंडक की बयार की व्यवस्थाभगवान को शीतलता के लिए गलंतिका,भक्तों के लिए रेड कारपेट-ठंडक के लिए 50 जम्बो कुलर दान में मिले,गला तर करने के लिए भी शुद्ध पेयजल

उज्जैन।भगवान से भक्त और भक्त से भगवान की उक्ति को श्री महाकालेश्वर मंदिर में चरितार्थ किया जा रहा है। वैशाख एवं ज्येष्ठ माह में भगवान को शीतलता के लिए पवित्र नदियों के जल की गलंतिका बांधी गई है। भक्तों के लिए रेड कारपेट से लेकर कुलर एवं शीतल जल की व्यवस्था की जा रही है। ग्रीष्म काल से बचाव के लिए में व्यवस्था में ठंडक की बयार दी जा रही है। भगवान एवं भक्त दोनों इस शीतलता में हैं।हलाहल कंठ में धरने वाले भगवान श्री महाकालेश्वर के लिए परंपरानुसार शीतलता की व्यवस्था वैशाख एवं ज्येष्ठ माह में की जाती है। भगवान की इस व्यवस्था के साथ ही भक्तों की व्यवस्था भी सुदृढता ले रही है। दानदाताओं के सहयोग से इसे और सक्षम बनाया जा रहा है।गलंतिका से सतत जलाभिषेक- परंपरानुसार विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर भगवान को 03 अप्रैल (वैशाख कृष्ण प्रतिपदा) से 29 जून (ज्येष्ठ पूर्णिमा) तक 11 मिट्टी के कलशों के माध्यम से सतत जलधारा हेतु गलंतिका लगाई गई है।  इन कलशों में गंगा, सिंधु, सरस्वती, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी, सरयू, क्षिप्रा एवं गण्डकी जैसी पवित्र नदियों का स्मरण, आव्हान एवं ध्यान मंत्रों के साथ जल स्थापित कर भगवान श्री महाकालेश्वर पर निरंतर शीतल जलधारा अर्पण प्रारंभ हुआ है। यह अभिषेक प्रतिदिन प्रातः भस्मारती के पश्चात प्रारंभ होकर सायंकालीन पूजन तक निरंतर है। इस वर्ष ज्येष्ठ मास के पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) होने के कारण एक माह अतिरिक्त कुल तीन माह भगवान को शीतलता के लिए जलधारा अर्पित की जाएगी।भक्तों के लिए 50 जम्बो कुलर मिले-भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की ग्रीष्म ऋतु में गर्मी से बचाव के लिए संजीव कुमार गुप्ता, समरकूल होम अप्लायंसेज गाजियाबाद एवं पंडित राधेश्याम शास्त्री द्वारा 50 नग जम्बो कूलर दान किए गए। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उनका स्वागत एवं सम्मान किया गया।भक्तों के लिए जुटाई व्यवस्था-ग्रीष्म ऋतु में लगातार बढ़ते तापमान को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंध समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए विशेष व्यवस्थाएं जुटाई गई है। विगत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष व्यवस्था को और अधिक सुदृढता प्रदान की गई है। श्रद्धालुओं के लिए संपूर्ण दर्शन पथ पर मैट (मेटिंग) बिछाई गई है। दर्शन मार्ग के विभिन्न प्रमुख स्थलों पर शीतल पेयजल की समुचित व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर एवं दर्शन पथ पर ठंडी एवं स्वच्छ हवा का सतत प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए कुलर लगाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, घुटन, निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) एवं अन्य आकस्मिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए मंदिर परिसर में आपात चिकित्सा व्यवस्था सुदृढ़ की गई है। प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है।

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